Thursday, July 1, 2010

यु ही...

आज यु ही खुद से बाते करने का दिल है

अपने मन की जिद्द पूरी करने का दिल है,

बचपन के दिनों में लौट जाने का दिल है,

बारिश में भीग जाने का दिल है,

अपना मनपसंद गाना गुनगुनाने का दिल है,

हाथो में मेहंदी, आँखों में काजल लगाने का दिल है,

पेरो में पायल पहन नाचने का दिल है,

डायरी में पड़ी पुरानी चीठिया फिर पड़ने का दिल है,

सिरहाने पड़ी उसकी तस्वीर देखने का दिल है,

ज़िन्दगी के बीते हर उद्दास पल पे हसने का दिल है,

आज बस यु ही खुद से प्यार करने का दिल है...



हरप्रीत धंजल

Sunday, June 27, 2010

कागज़ कलम

उकेर दूंगी आज

अपने हर सपने हकीक़त के

पन्नो पर,

बह जाने दूंगी

अपनी इच्छाओ के सागर को,

अपने आंसुओ की स्हाई से

कलम को भीगा दूंगी

हर अक्षरों पर

अपने रंग भर दूंगी
 
तितली बन जाउगी

खाव्बो के रंग बिरंगे पंख लगाकर

उड़ जाउगी




हरप्रीत धंजल

Thursday, June 24, 2010

मेरे सपने

बंद आँखों से सपने नहीं
मैंने खुली आँखों से देखे है,
अपनी किस्मत पे नहीं
क़ाबलियत पर पासे फेंके है ,
कंकर पत्थर मुझे अपनों ने हे मारे है
इन्ही कंकर पथरो से मैंने अपने रास्ते बनाये है,
इन रास्तो में मेरे मै बिलकुल हूँ अकेली
है सपने मेरे दोस्त और कोशिश मेरी सहेली,
सबने कहा अब बस कर तू कुछ नहीं कर पायेगी
मैंने कहा अभी तो शुरुवात है अभी बहुत मुश्किलें आएँगी,
अब तो हर पल मै अपने सपनो को दोहराती हूँ
किस्मत भी मेरी बोली के रुक जा मै भी तेरे संग आती हूँ.



हरप्रीत धंजल

Tuesday, May 11, 2010

आसमान की नीली छत है मेरा रेन बसेरा

फूटपाथ की नरम ईटे अब है बिसतर मेरा,

मेरी माँ के फटे आँचल तले भी डराता नहीं घोर अँधेरा


आंसू भरी आँखों में ही कट जाता है मेरा हर सवेरा.



हरप्रीत धंजल




Wednesday, February 3, 2010

जब सपना होगा पूरा

कैसा मन्जर होगा

जब सपना होगा पूरा,

सुरज होगा तपन मे

और चान्द फलक पे पूरा।



हरप्रीत धंजल

उदासी का आलम

उदासी का आलम कुछ यु गुजरा,
सपने भी आँखों मी तड्पते रहे
मन्जिल तो थी सामने,
पर हाथ मजबूरी में जकडे रहे.



हरप्रीत धंजल