आज यु ही खुद से बाते करने का दिल है
अपने मन की जिद्द पूरी करने का दिल है,
बचपन के दिनों में लौट जाने का दिल है,
बारिश में भीग जाने का दिल है,
अपना मनपसंद गाना गुनगुनाने का दिल है,
हाथो में मेहंदी, आँखों में काजल लगाने का दिल है,
पेरो में पायल पहन नाचने का दिल है,
डायरी में पड़ी पुरानी चीठिया फिर पड़ने का दिल है,
सिरहाने पड़ी उसकी तस्वीर देखने का दिल है,
ज़िन्दगी के बीते हर उद्दास पल पे हसने का दिल है,
आज बस यु ही खुद से प्यार करने का दिल है...
हरप्रीत धंजल
Thursday, July 1, 2010
Sunday, June 27, 2010
कागज़ कलम
उकेर दूंगी आज
अपने हर सपने हकीक़त के
पन्नो पर,
बह जाने दूंगी
अपनी इच्छाओ के सागर को,
अपने आंसुओ की स्हाई से
कलम को भीगा दूंगी
हर अक्षरों पर
अपने रंग भर दूंगी
तितली बन जाउगी
खाव्बो के रंग बिरंगे पंख लगाकर
उड़ जाउगी
हरप्रीत धंजल
अपने हर सपने हकीक़त के
पन्नो पर,
बह जाने दूंगी
अपनी इच्छाओ के सागर को,
अपने आंसुओ की स्हाई से
कलम को भीगा दूंगी
हर अक्षरों पर
अपने रंग भर दूंगी
तितली बन जाउगी
खाव्बो के रंग बिरंगे पंख लगाकर
उड़ जाउगी
हरप्रीत धंजल
Thursday, June 24, 2010
मेरे सपने
बंद आँखों से सपने नहीं
मैंने खुली आँखों से देखे है,
अपनी किस्मत पे नहीं
क़ाबलियत पर पासे फेंके है ,
कंकर पत्थर मुझे अपनों ने हे मारे है
इन्ही कंकर पथरो से मैंने अपने रास्ते बनाये है,
इन रास्तो में मेरे मै बिलकुल हूँ अकेली
है सपने मेरे दोस्त और कोशिश मेरी सहेली,
सबने कहा अब बस कर तू कुछ नहीं कर पायेगी
मैंने कहा अभी तो शुरुवात है अभी बहुत मुश्किलें आएँगी,
अब तो हर पल मै अपने सपनो को दोहराती हूँ
किस्मत भी मेरी बोली के रुक जा मै भी तेरे संग आती हूँ.
हरप्रीत धंजल
मैंने खुली आँखों से देखे है,
अपनी किस्मत पे नहीं
क़ाबलियत पर पासे फेंके है ,
कंकर पत्थर मुझे अपनों ने हे मारे है
इन्ही कंकर पथरो से मैंने अपने रास्ते बनाये है,
इन रास्तो में मेरे मै बिलकुल हूँ अकेली
है सपने मेरे दोस्त और कोशिश मेरी सहेली,
सबने कहा अब बस कर तू कुछ नहीं कर पायेगी
मैंने कहा अभी तो शुरुवात है अभी बहुत मुश्किलें आएँगी,
अब तो हर पल मै अपने सपनो को दोहराती हूँ
किस्मत भी मेरी बोली के रुक जा मै भी तेरे संग आती हूँ.
हरप्रीत धंजल
Tuesday, May 11, 2010
Wednesday, February 3, 2010
जब सपना होगा पूरा
कैसा मन्जर होगा
जब सपना होगा पूरा,
सुरज होगा तपन मे
और चान्द फलक पे पूरा।
हरप्रीत धंजल
जब सपना होगा पूरा,
सुरज होगा तपन मे
और चान्द फलक पे पूरा।
हरप्रीत धंजल
उदासी का आलम
उदासी का आलम कुछ यु गुजरा,
सपने भी आँखों मी तड्पते रहे
मन्जिल तो थी सामने,
पर हाथ मजबूरी में जकडे रहे.
हरप्रीत धंजल
सपने भी आँखों मी तड्पते रहे
मन्जिल तो थी सामने,
पर हाथ मजबूरी में जकडे रहे.
हरप्रीत धंजल
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