Monday, February 11, 2013

मुस्कुराती हूँ


मुस्कुराती हूँ अकेली जब होती हूँ
सोच के उन बातो को
जिनसे कभी दिल दुख करता था
आसू भी गिर आते है
ये सोच कर के की
कितनी नादान थी तब
तब ये अगर पता होता तो,
तो ये आंसू आज यु ना टपकते
फिर सोचा,
सोचा के ये अनुभव भी ना हुए होते
होते तो सिर्फ कुछ नीरस ज़िन्दगी
के बिताये पल
जिन पर ना वजह होती रोने की
न बेवजह हसने की

हरप्रीत