Monday, February 11, 2013

मुस्कुराती हूँ


मुस्कुराती हूँ अकेली जब होती हूँ
सोच के उन बातो को
जिनसे कभी दिल दुख करता था
आसू भी गिर आते है
ये सोच कर के की
कितनी नादान थी तब
तब ये अगर पता होता तो,
तो ये आंसू आज यु ना टपकते
फिर सोचा,
सोचा के ये अनुभव भी ना हुए होते
होते तो सिर्फ कुछ नीरस ज़िन्दगी
के बिताये पल
जिन पर ना वजह होती रोने की
न बेवजह हसने की

हरप्रीत

Sunday, January 27, 2013

हाथ थोडा तंग है



माँ ने कहा बेटा मेरी चप्पल टूट गयी है
एक जोड़ी नयी चप्पल लेनी है
थोड़े पैसे दे दोगे
बीवी के साथ बाहर डिनर करने जा रहे बेटे ने
तपाक के जवाब दिया
माँ अगले महीने ले लेना
इस बारी हाथ थोडा तंग है |
बूढ़े बाप ने कहा बेटा मेरा चश्मे का
नंबर शायद बदल गया है
अगर तुम्हारे पास टाइम हो तो डॉक्टर के पास ले चलना
दोस्तों के साथ पार्टी में बिजी था बेटा
तो कोने में ले जा कर पिता से बोल
डैडी अगले महीने ले चलूँगा
इस बारी हाथ थोडा तंग है |

दवाई जब ख़तम हुई माँ की तो
बहु को दवाई की पर्ची
देते हुई बोली
बेटी बाज़ार जा ही रही हो तो
मेरी दवाई लेती आना
तो बहु बोली मम्मी जी
अगले महीने ले लेना
इस बारी हाथ थोडा तंग है |

पिता का लाडला छोटा बेटा
बोल पिता से पापा
मैं मूवी देखने जा रहा हूँ  थोडा लेट हो जाऊंगा
तो पिता ने कहा बेटा ये मेरी घडी बंद हो गयी है
आते वक़्त ठीक करा लाना
तो पिता का लाडला बोल पापा
अगले महीने करा दूंगा
इस बारी हाथ थोडा तंग है |

शाम को घर लोटी छोटी बिटिया
ख़ुशी में झूमती चिल्लाने लगी
मम्मी, मम्मी, डैडी
ये देखिये मेरी पहली तनखा
तो पिता ने प्यार से सर पे हाथ फेरते हुए बोले
शाबाश बेटा, जीते रहो, खूब तरक्की करो
थेंक्यु पापा कह कर
हथेली पर सैलरी रखते हुई बोली
इस महीने आप रख लो
अगले बारी मेरी |




अनुभव


अनुभव ये कुछ दिल की गहराई में उतर गया था बात तब की है जब मैं अपनी माँ के साथ मेट्रो में सफ़र कर रही थी हमारी साथ वाली सीट  पे एक महिला अपनी ४-५ साल की बेटी के साथ बैठी थी, उनकी बेटी बहुत ही प्यारी सी थी वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी , तभी एक स्टेशन आया और एक लड़का मेट्रो में चढ़ा वो हमारे पास ही खड़ा हो गया था जब उसने अपना चेहरा हमारी तरफ घुमाया तो मैंने देखा के उसके चेहरे पे जलने के बहुत ही गहरे घाव थे वो बहुत सहमा सा खड़ा था उसने अपना मुह निचे कर रक्खा था मानो वो सबसे बच रहा था नहीं चाहता था के कोई उसे देखे ज़ाहिर भी था क्यूंकि आज कल लोग ऐसे लोगो को मजाक का पात्र बना देते है और बार बार उन्हें ऐसे देखते है जैसे वो किसी और दुनिया से  हो ऐसे में उस व्यक्ति के आत्मा को कितनी चोट पहुचती होगी इसका अंदाजा लगाना अस्संभव है वह लड़का लगभग उस महिला के पास की सीट के पास खड़ा हो गया था जो अपनी ४-५ साल की बेटी के साथ सफ़र कर रही थी | थोड़ी देर में जब वो बच्ची अपनी माँ की गोद से नीचे उतरी तो उस लड़के को देख कर मुस्कुराने लगी, उसकी वो मुस्कराहट ने उस लड़के के उदास मुख वो ख़ुशी बिखेर दी जो शायद कही गुम हो गयी थी, फिर वो बच्ची उस के साथ हसी ठिठोली करने लगी वो कभी पानी माँ की गोद में सर छुपा लेती तो कभी उस लड़के को देख कर मुस्कुराने लगती तो कभी खिलखिला कर हसने लगती उस बच्ची की मुस्कराहट  के जवाब ने उस लड़के ने भी मुस्कुरा कर उसके सर पर हाथ फेर दिया थोड़ी ही देर में अगला स्टेशन आया तो दो लडकिया मेट्रो में आई वो दोनों लडकिया उस लड़के को देख कर ऐसे पीछे हट गयी और उस की तरफ देख कर बाते करने लगी उस लड़के को ये एहसास हो गया था के वो उसकी ही बात कर रही है ये देख कर मेरे आत्मा को बहुत ठेस पहुची होगी . ये देख कर मुझे वो बात याद आई किसी ने सच ही कहा है के बच्चे भगवन का रूप होते है जो किसी में भेदभाव नहीं करते |