जिज्ञासा
Tuesday, May 11, 2010
आसमान की नीली छत है मेरा रेन
बसेरा
फूटपाथ की नरम ईटे अब है बिसतर मेरा,
मेरी माँ के फटे आँचल तले भी डराता नहीं घोर अँधेरा
आंसू भरी आँखों में ही कट जाता है मेरा हर सवेरा.
हरप्रीत धंजल
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