उकेर दूंगी आज
अपने हर सपने हकीक़त के
पन्नो पर,
बह जाने दूंगी
अपनी इच्छाओ के सागर को,
अपने आंसुओ की स्हाई से
कलम को भीगा दूंगी
हर अक्षरों पर
अपने रंग भर दूंगी
तितली बन जाउगी
खाव्बो के रंग बिरंगे पंख लगाकर
उड़ जाउगी
हरप्रीत धंजल
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