अनुभव ये कुछ दिल की गहराई में उतर गया था बात तब की है जब मैं अपनी माँ के साथ मेट्रो में सफ़र कर रही थी हमारी साथ वाली सीट पे एक महिला अपनी ४-५ साल की बेटी के साथ बैठी थी, उनकी बेटी बहुत ही प्यारी सी थी वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी , तभी एक स्टेशन आया और एक लड़का मेट्रो में चढ़ा वो हमारे पास ही खड़ा हो गया था जब उसने अपना चेहरा हमारी तरफ घुमाया तो मैंने देखा के उसके चेहरे पे जलने के बहुत ही गहरे घाव थे वो बहुत सहमा सा खड़ा था उसने अपना मुह निचे कर रक्खा था मानो वो सबसे बच रहा था नहीं चाहता था के कोई उसे देखे ज़ाहिर भी था क्यूंकि आज कल लोग ऐसे लोगो को मजाक का पात्र बना देते है और बार बार उन्हें ऐसे देखते है जैसे वो किसी और दुनिया से हो ऐसे में उस व्यक्ति के आत्मा को कितनी चोट पहुचती होगी इसका अंदाजा लगाना अस्संभव है वह लड़का लगभग उस महिला के पास की सीट के पास खड़ा हो गया था जो अपनी ४-५ साल की बेटी के साथ सफ़र कर रही थी | थोड़ी देर में जब वो बच्ची अपनी माँ की गोद से नीचे उतरी तो उस लड़के को देख कर मुस्कुराने लगी, उसकी वो मुस्कराहट ने उस लड़के के उदास मुख वो ख़ुशी बिखेर दी जो शायद कही गुम हो गयी थी, फिर वो बच्ची उस के साथ हसी ठिठोली करने लगी वो कभी पानी माँ की गोद में सर छुपा लेती तो कभी उस लड़के को देख कर मुस्कुराने लगती तो कभी खिलखिला कर हसने लगती उस बच्ची की मुस्कराहट के जवाब ने उस लड़के ने भी मुस्कुरा कर उसके सर पर हाथ फेर दिया थोड़ी ही देर में अगला स्टेशन आया तो दो लडकिया मेट्रो में आई वो दोनों लडकिया उस लड़के को देख कर ऐसे पीछे हट गयी और उस की तरफ देख कर बाते करने लगी उस लड़के को ये एहसास हो गया था के वो उसकी ही बात कर रही है ये देख कर मेरे आत्मा को बहुत ठेस पहुची होगी . ये देख कर मुझे वो बात याद आई किसी ने सच ही कहा है के बच्चे भगवन का रूप होते है जो किसी में भेदभाव नहीं करते |
Sunday, January 27, 2013
अनुभव
अनुभव ये कुछ दिल की गहराई में उतर गया था बात तब की है जब मैं अपनी माँ के साथ मेट्रो में सफ़र कर रही थी हमारी साथ वाली सीट पे एक महिला अपनी ४-५ साल की बेटी के साथ बैठी थी, उनकी बेटी बहुत ही प्यारी सी थी वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी , तभी एक स्टेशन आया और एक लड़का मेट्रो में चढ़ा वो हमारे पास ही खड़ा हो गया था जब उसने अपना चेहरा हमारी तरफ घुमाया तो मैंने देखा के उसके चेहरे पे जलने के बहुत ही गहरे घाव थे वो बहुत सहमा सा खड़ा था उसने अपना मुह निचे कर रक्खा था मानो वो सबसे बच रहा था नहीं चाहता था के कोई उसे देखे ज़ाहिर भी था क्यूंकि आज कल लोग ऐसे लोगो को मजाक का पात्र बना देते है और बार बार उन्हें ऐसे देखते है जैसे वो किसी और दुनिया से हो ऐसे में उस व्यक्ति के आत्मा को कितनी चोट पहुचती होगी इसका अंदाजा लगाना अस्संभव है वह लड़का लगभग उस महिला के पास की सीट के पास खड़ा हो गया था जो अपनी ४-५ साल की बेटी के साथ सफ़र कर रही थी | थोड़ी देर में जब वो बच्ची अपनी माँ की गोद से नीचे उतरी तो उस लड़के को देख कर मुस्कुराने लगी, उसकी वो मुस्कराहट ने उस लड़के के उदास मुख वो ख़ुशी बिखेर दी जो शायद कही गुम हो गयी थी, फिर वो बच्ची उस के साथ हसी ठिठोली करने लगी वो कभी पानी माँ की गोद में सर छुपा लेती तो कभी उस लड़के को देख कर मुस्कुराने लगती तो कभी खिलखिला कर हसने लगती उस बच्ची की मुस्कराहट के जवाब ने उस लड़के ने भी मुस्कुरा कर उसके सर पर हाथ फेर दिया थोड़ी ही देर में अगला स्टेशन आया तो दो लडकिया मेट्रो में आई वो दोनों लडकिया उस लड़के को देख कर ऐसे पीछे हट गयी और उस की तरफ देख कर बाते करने लगी उस लड़के को ये एहसास हो गया था के वो उसकी ही बात कर रही है ये देख कर मेरे आत्मा को बहुत ठेस पहुची होगी . ये देख कर मुझे वो बात याद आई किसी ने सच ही कहा है के बच्चे भगवन का रूप होते है जो किसी में भेदभाव नहीं करते |
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So true to facts of enveloped life we live everyday! We talk about being sensitive to society, but when it comes to take a dip, no one want to get muddy. Kids are innocent, however, unfortunately, now-a-days, even they have got the lifestyle, due to exposure to the Pseudo happiness!
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